जरुरी जानकारी इंडिया सॉथबी इंटरनेशनल, एएसके प्रॉपर्टी फंड ने 1,000 करोड़ रुपये का कोष बनाया LatestLY हिन्दी
बांग्लादेश में पिछले कुछ हफ्तों से जारी राजनीतिक संकट की वजह से आर्थिक हालात खराब हुए हैं और आम लोगों पर आर्थिक संकट का असर गहराता जा रहा है. ऐतिहासिक रूप से पड़ोसी देशों में अपने प्रति नरमी रखने वाले सियासी दलों पर भारत की निर्भरता, इस उथल पुथल भरे, भारत विरोधी जज़्बात और चीन के बढ़ते प्रभाव वाले क्षेत्र में अपने हितों का तालमेल बिठाने की उसकी ज़रूरत को दिखाता है. इस रणनीति की कमियों को स्वीकार करते हुए भारत ने अपने सिद्धांतों और व्यवहारिकता के बीच तालमेल बिठाते हुए दक्षिण एशिया में ज़्यादा व्यवहारिक नीति का रुख़ अपनाया है. अब भारत ने अपने पड़ोसी देशों के राष्ट्रवादी, भारत विरोधी और चीन समर्थक नेताओं के साथ साथ तख़्तापलट करने वाले नेताओं के साथ भी संवाद बढ़ाया है. पिछले साल अगस्त में छात्रों ने आरक्षण के खिलाफ आंदोलन शुरू किया जो बढ़ते-बढ़ते प्रधानमंत्री शेख हसीना की सरकार गिराने पर रुका. देश की बागडोर कुछ समय के लिए अंतरिम सरकार के हाथ में आ गई.
शेख़ हसीना के कार्यकाल 2009 से जुलाई 2024 के बीच बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था 6.3 प्रतिशत की दर से बढ़ी. जीडीपी का आकार 123 अरब डॉलर से बढ़कर 455 अरब डॉलर हो गया. 2009 में बांग्लादेश की प्रति व्यक्ति जीडीपी भी 841 डॉलर से बढ़कर 2024 में 2,650 डॉलर हो गई. पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने पाकिस्तान के दो टुकड़े करके बांग्लादेश बसा दिया. लेकिन जिस चटगांव से ‘बांग्लादेश मुक्ति संग्राम’ का ऐलान हुआ, भारत के जयघोष गूंजे, अब उसी चटगांव में चीन सबसे बड़ा औद्योगिक शहर बसाने जा रहा है.
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चाहे वो सैन्य शक्ति का मामला हो या आर्थिक तौर पर संपन्नता का. अमेरिका और यूरोप का अब तक चीन में निवेश होता था, लेकिन कोराना के बाद अमेरिका और यूरोप ने वहां निवेश कम कर दिया. यहां तक की पहले से किए चीन में निवेश को भारत सहित अन्य देशों में निवेश करना शुरू कर दिया. इससे चीन को आर्थिक झटका लगने लगा और कोरोना के बाद अब तक चीन की अर्थव्यवस्था उबर नहीं सकी है. सीमा पर तनाव पैदा कर वह भारत पर दबाव बना रहा है कि भारत उसके हितों से न खेले.
बांग्लादेश की राजनीति पिछले तीन दशक से दो राजनीतिक धुरी पर घूम रही थी. चाहे पाकिस्तान हो या चीन, दोनों से शेख हसीना के अच्छे संबंध नहीं थे. Quotex Bangladesh लेकिन खालिदा जिया के इन दोनों देशों से अच्छे रिश्ते हैं.
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मोंगला बंदरगाह में रुचि रखकर भारत का लक्ष्य क्षेत्रीय स्थिरता और सुरक्षा में योगदान करना है. बंगाल की खाड़ी क्षेत्र प्रमुख शक्तियों से जुड़ी भू-राजनीतिक गतिशीलता से चिह्नित है. अब भारत में उद्योग जगत और निर्यातकों की नजर बांग्लादेश में मोहम्मद यूनुस सरकार की नई आर्थिक नीतियों पर है. इस साल शेख़ हसीना भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तीसरे कार्यकाल की पहली विदेशी मेहमान थीं. हाल ही में अमेरिका द्वारा भारतीय वस्त्र आयात पर लगाए गए रेसिप्रोकल टैरिफ (लगभग 27%) के परिप्रेक्ष्य में यह नीति राजस्थान के निर्यातकों के लिए विशेष लाभकारी मानी जा रही है.
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तुर्किए के बांग्लादेश के साथ बढ़ते संबंध और पाकिस्तान के साथ उसके गहरे रिश्ते भारत के लिए एक रणनीतिक चुनौती प्रस्तुत कर सकते हैं. दशकों से भारत और बांग्लादेश के बीच मजबूत व्यापार और रक्षा सहयोग रहा है, लेकिन हाल के राजनीतिक बदलावों और बांग्लादेश की विदेशी साझेदारियों में विविधता लाने की रुचि के कारण भारत की स्थिति कमजोर हो सकती है. छात्रों, इस्लामवादियों और बांग्लादेशी सेना के बीच बढ़ते तनाव और सैन्य प्रतिष्ठान के भीतर आंतरिक मतभेद भारत के लिए चिंता का विषय हैं. सेना प्रमुख के भारत के करीब होने और शेख हसीना की अवामी लीग पार्टी को एक अलग अवतार में फिर से पेश करने के लिए दिल्ली के साथ मिलकर काम करने की अफवाहें बांग्लादेश में लगातार फैल रही हैं.
आने वाले वक़्त में, बांग्लादेश को अपनी ऊर्जा सुरक्षा और सस्टेनेबल एनर्जी के लिए ख़ुद को तैयार करना होगा. रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद दुनिया भर में ऊर्जा सुरक्षा एक अहम मुद्दा बन चुका है. ऐसे समय में बांग्लादेश तक जाने वाला भारत का पावर कॉरिडोर उसके लिए एक सकरात्मक शुरुआत है.
यही वजह है कि अह मोहम्मद यूनुस के खिलाफ बांग्लादेश में आवाज बुलंद होने लगी है. बांग्लादेश में भी अब पाकिस्तान जैसी कंगाली छाने लगी है. मोहम्मद यूनुस के बांग्लादेश में आर्थिक संकट गहराता जा रहा है.
भारत में सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी के नेता कह रहे हैं कि अगर भारत ने बांग्लादेश में ज़रूरी आपूर्ति रोक दी तो इसका बहुत गहरा असर पड़ेगा. बांग्लादेश में म्यांमार सीमा से याबा जैसी नशीली दवाओं की तस्करी तेजी से बढ़ रही है. रोहिंग्या समूहों और अराकान आर्मी के बीच जारी संघर्ष इस तस्करी को बढ़ावा दे रहा है. तटरक्षक बल लगातार छापेमारी कर रहे हैं, पर तस्करों का नेटवर्क मजबूत है और टूट नहीं पा रहा है.
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